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गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें बप्पा की स्थापना, हर मनोकामना होगी पूरी
Manuastro · 10 Sept 2026
गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें बप्पा की स्थापना, हर मनोकामना होगी पूरी
गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें बप्पा की स्थापना , हर मनोकामना होगी पूरी
गणेश चतुर्थी भगवान श्रीगणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला प्रमुख हिंदू पर्व है। यह त्योहार हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त अपने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा, आरती और भोग अर्पित करते हैं। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, सुख-समृद्धि और विघ्नों का नाश करने वाला देवता माना जाता है। गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि परिवार, समाज और संस्कृति को जोड़ने वाला उत्सव भी है, जो लोगों में भक्ति, सकारात्मकता और एकता का संदेश देता है।
गणेश उत्सव का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि, ज्ञान और शुभता के देवता माना जाता है। इसलिए किसी भी नए कार्य, पूजा, यात्रा, व्यवसाय या मांगलिक आयोजन की शुरुआत सबसे पहले उनकी पूजा से की जाती है। मान्यता है कि भगवान गणेश की कृपा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और सफलता, सुख-समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। गणेश उत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और संस्कृति को जोड़ने वाला उत्सव भी है। इस दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर उत्तम स्वास्थ्य, धन, सुख, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।
भगवान गणेश के जन्म की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने अपने शरीर पर लगाए गए चंदन (या उबटन) के लेप से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण फूंककर उसे अपना पुत्र बनाया। स्नान के समय उन्होंने गणेश जी को द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया। उसी दौरान भगवान शिव वहाँ पहुंचे, लेकिन गणेश जी ने माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। इससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने उनका सिर काट दिया। जब माता पार्वती को यह ज्ञात हुआ तो वे अत्यंत दुखी हुईं। उन्हें शांत करने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा की ओर मुख किए हुए पहले जीव का सिर लाने का आदेश दिया। वह एक हाथी था। भगवान शिव ने हाथी का सिर गणेश जी के धड़ पर स्थापित कर उन्हें पुनर्जीवित किया और उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। तभी से किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक दृृष्टि से गणेश चतुर्थी का महत्व सदियों पुराना है, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से मनाने की परंपरा 19वीं शताब्दी के अंत में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने शुरू की। उनका उद्देश्य इस उत्सव के माध्यम से लोगों को एकजुट करना और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाना था। समय के साथ यह पहल भारत के सबसे बड़े और लोकप्रिय धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सवों में बदल गई, जिसे आज पूरे देश में श्रद्धा, उत्साह और सामूहिक भागीदारी के साथ मनाया जाता है।
गणेश स्थापना की सही विधि

► घर की अच्छी तरह सफाई करके पूजा स्थल को शुद्ध करें।
► शुभ मुहूर्त में लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
► भगवान गणेश की प्रतिमा को पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर स्थापित करें।
► स्थापना से पहले प्रतिमा पर गंगाजल का छिड़काव करें।
► भगवान गणेश का आह्वान कर विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा करें।
► रोली, अक्षत, दूर्वा, लाल पुष्प और सिंदूर अर्पित करें।
► मोदक, लड्डू, फल और नारियल का भोग लगाएं।
► धूप, दीप जलाकर गणेश जी की आरती करें।
► पूजा के दौरान गणेश मंत्र या गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
► स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा, आरती और भोग अवश्य अर्पित करें।
गणेश जी को प्रिय भोग और प्रसाद

• मोदक - भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग माना जाता है।
• बेसन के लड्डू - श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जाने वाले लोकप्रिय प्रसाद।
• बूंदी के लड्डू - गणेश जी को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं।
• नारियल - पूजा और भोग में शुभता का प्रतीक।
• गुड़ और चना - सरल और सात्विक प्रसाद।
• केला - भगवान गणेश को अर्पित किया जाने वाला शुभ फल।
• अनार, सेब और मौसमी फल - ताजे फलों का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
• खीर - विशेष अवसरों पर अर्पित किया जाने वाला सात्विक भोग।
• पंचामृत - दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पवित्र प्रसाद।
गणेश जी को क्या अर्पित नहीं करना चाहिए

♦ तुलसी के पत्ते - सामान्यतः भगवान गणेश की पूजा में तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
♦ बासी या खराब भोजन - हमेशा ताजा और सात्विक भोग ही अर्पित करें।
♦ मुरझाए हुए फूल - सूखे या टूटे-फूटे फूल चढ़ाने से बचें।
♦ खंडित या टूटी हुई प्रतिमा - ऐसी प्रतिमा की पूजा करना उचित नहीं माना जाता।
♦ तामसिक भोजन - मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज युक्त भोजन का भोग न लगाएं।
♦ अशुद्ध या गंदे वस्त्र - पूजा के समय स्वच्छ वस्त्र और शुद्धता का ध्यान रखें।
♦ कृृत्रिम या प्लास्टिक के फूल - पूजा में प्राकृतिक और ताजे फूलों का ही प्रयोग करें।
♦ बिना श्रद्धा या जल्दबाजी में पूजा - भगवान गणेश की पूजा शांत मन, श्रद्धा और विधि-विधान से करना श्रेष्ठ माना जाता है।
गणेश जी से जुड़े रोचक रहस्य और मान्यताएँ

♦ भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है।
♦ किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा करने की परंपरा है।
♦ दूर्वा और मोदक भगवान गणेश को सबसे अधिक प्रिय माने जाते हैं।
♦ गणेश जी का एकदंत स्वरूप त्याग, ज्ञान और धैर्य का प्रतीक माना जाता है।
♦ उनका वाहन मूषक (चूहा) इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण का संदेश देता है।
♦ भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है।
♦ गणेश जी की सूंड दाईं या बाईं ओर होने के अनुसार पूजा-विधि और मान्यताएँ अलग मानी जाती हैं।
♦ मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से गणेश जी की आराधना करने पर जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
गणेश चतुर्थी के प्रमुख गणेश मंदिर
श्री सिद्धिविनायक मंदिर - मुंबई, महाराष्ट्र
श्री दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर - पुणे, महाराष्ट्र
श्री अष्टविनायक मंदिर समूह - महाराष्ट्र
श्री कणिपाकम वरसिद्धि विनायक मंदिर - आंध्र प्रदेश
श्री इडगुंजी महागणपति मंदिर - कर्नाटक
श्री डोड्डा गणपति मंदिर - बेंगलुरु, कर्नाटक
श्री रणथंभौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर - सवाई माधोपुर, राजस्थान
श्री मनाकुला विनयगर मंदिर - पुडुचेरी
श्री उच्ची पिल्लयार मंदिर - तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
श्री मोती डूंगरी गणेश मंदिर - जयपुर, राजस्थान
गणेश चतुर्थी 2026ः कब शुरू होगी और कब समाप्त होगी?
वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इसी दिन भगवान श्रीगणेश की स्थापना की जाएगी और दस दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना, आरती एवं भक्ति का उत्सव चलेगा। अनंत चतुर्दशी, यानी बुधवार, 23 सितंबर 2026 को गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा, जिसके साथ गणेश उत्सव का समापन होगा।
गणेश चतुर्थी 2026 (तिथि एवं शुभ मुहूर्त)
गणेश चतुर्थीः सोमवार, 14 सितम्बर 2026
चतुर्थी तिथि प्रारंभः 14 सितम्बर 2026, सुबह 07ः06 मिनट से
चतुर्थी तिथि समाप्तः 15 सितम्बर 2026, सुबह 07ः44 मिनट तक
गणेश पूजा मुहूर्तः 11ः02 मिनट से 01ः31 मिनट तक
पूजा मुहूर्त की अवधिः 2 घंटे 28 मिनट
गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) शुक्रवार, 25 सितम्बर 2026
गणेश चतुर्थी से जुड़े सामान्य प्रश्न
1. गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को।
2. गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?
भगवान श्रीगणेश के जन्मोत्सव के रूप में।
3. गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है?
क्योंकि हर शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा करने की परंपरा है।
4. गणेश जी का प्रिय भोग क्या है?
मोदक, लड्डू, दूर्वा और नारियल।
5. गणेश स्थापना किस दिशा में करनी चाहिए?
पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा शुभ मानी जाती है।
6. गणेश जी को क्या अर्पित नहीं करना चाहिए?
तुलसी के पत्ते, बासी भोजन और मुरझाए हुए फूल।
7. गणेश चतुर्थी कितने दिनों तक मनाई जाती है?
आमतौर पर 1, 3, 5, 7 या 10 दिनों तक, जिसका समापन अनंत चतुर्दशी पर होता है।
8. गणेश विसर्जन का क्या महत्व है?
यह सृष्टि के परिवर्तन, अनित्यता और पुनः आगमन की भावना का प्रतीक माना जाता है।
9. क्या घर में छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित की जा सकती है?
हाँ, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ छोटी प्रतिमा स्थापित की जा सकती है।
10. गणेश चतुर्थी पर कौन-सा मंत्र जपना शुभ माना जाता है?
ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जप अत्यंत शुभ माना जाता है।