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नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा, नोट करें पूजा मुहूर्त, विधि, शुभ योग और उपाय
MANUASTRO · 17 Oct 2026
शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित होता है, जिसे महाअष्टमी (दुर्गा अष्टमी) के रूप में मनाया जाता है।
मां महागौरी का स्वरूप और महत्व
रूप व वर्ण: मां महागौरी का वर्ण शंख, चंद्रमा और कुंद के पुष्प के समान अत्यंत श्वेत और उज्जवल है। इनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत हैं।
वाहन व भुजाएं: इनका वाहन वृषभ (बैलों) है। इनकी चार भुजाएं हैं—ऊपर वाले दाएं हाथ में अभय मुद्रा, नीचे वाले दाएं हाथ में त्रिशूल, बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाले बाएं हाथ में वरद मुद्रा है।
ग्रह नियंत्रण: ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं।
पौराणिक कथा: भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता ने कठोर तपस्या की थी, जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था। बाद में भगवान शिव ने गंगाजल से उनके शरीर को धोया, जिससे उनका रंग अत्यंत गौरवर्ण (उज्ज्वल) हो गया और वे 'महागौरी' कहलाईं।
महाअष्टमी पूजा विधि और सामग्री
रंग: इस दिन सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
भोग: माता को नारियल, नारियल की बर्फी, लड्डू, हलवा और काले चने का भोग लगाया जाता है।
पुष्प: माता को मोगरा, चमेली या कुंद के सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। [
कन्या पूजन: महाअष्टमी के दिन छोटी कन्याओं (कुंवारी कन्याओं) का विशेष रूप से पूजन किया जाता है, इन्हें मां दुर्गा का रूप मानकर भोजन और उपहार दिए जाते हैं।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
- अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 2:00 बजे से 2:45 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 5:48 बजे से 6:13 बजे तक
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया।।
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहां निवासा।।
चंद्रकली और ममता अंबे। जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्याता।।
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।