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करवा चौथ कब है? जानें व्रत की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और चंद्रोदय का समय
MANUASTRO · 19 Oct 2026
वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा ।
महत्वपूर्ण तिथियां और समय (2026)
- चतुर्थी तिथि आरंभ: 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 01:06 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से शाम 06:56 बजे तक
- चंद्रोदय का समय: रात लगभग 08:17 बजे से 08:33 बजे के बीच (स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है)
- व्रत का समय: सुबह 06:31 बजे से रात 08:17 बजे तक
व्रत से जुड़ी मुख्य बातें
- निर्जला व्रत: सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए पूरे दिन निर्जला (बिना जल के) व्रत रखती हैं।
- सरगी: सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाई जाती है।
- पूजा विधि: शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और चंद्रमा की पूजा की जाती है तथा करवा चौथ की कथा सुनी जाती है।
- व्रत खोलना: रात को चाँद निकलने के बाद छन्नी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखकर, चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।
करवा चौथ की सबसे प्रचलित और संपूर्ण व्रत कथा रानी वीरवती और साहूकार की कथा पर आधारित है।
करवा चौथ की कथा (वीरवती की कहानी)
- साहूकार परिवार: प्राचीन समय में एक साहूकार के सात पुत्र और एक प्यारी बहन 'वीरवती' (या करवा) थी। वह अपनी बहन से बहुत स्नेह करते थे।
- पहला व्रत: विवाह के बाद वीरवती ने अपने मायके में कार्तिक मास की चतुर्थी के दिन करवा चौथ का पहला निर्जला व्रत (बिना पानी पिए) रखा।
- भाइयों की चिंता: शाम होते-होते वीरवती भूख और प्यास से बहुत व्याकुल हो उठी। भाइयों को अपनी बहन की यह हालत देखी नहीं गई।
- छल (कृत्रिम चंद्रमा): भाइयों ने एक पेड़ की आड़ में एक छलनी और दीपक की मदद से ऐसा प्रकाश किया, जो देखने में बिल्कुल चांद जैसा लग रहा था । उन्होंने बहन से कहा कि चांद निकल आया है और वह अर्घ देकर व्रत खोल ले।
- व्रत खंडित होना: वीरवती ने उसे असली चांद समझकर अर्घ दिया और भोजन कर लिया। खाना खाते ही उसे अपने पति के अस्वस्थ होने या निधन का बुरा समाचार मिला।
- माता पार्वती की कृपा: वीरवती दुखी होकर रास्ते में विलाप करने लगी। तब मां पार्वती ने उसे प्रकट होकर सत्य बताया और पूरे विधि-विधान से दोबारा करवा चौथ का व्रत करने को कहा।
- पति का जीवन: वीरवती ने श्रद्धा और नियम के साथ पुन: यह व्रत किया, जिससे उसकी निष्ठा और तपस्या देखकर भगवान ने उसके पति को पुनः जीवित कर दिया।